भारतीय रसोईघरों का विद्युतीकरण

पाठ्यक्रम: GS3/अर्थव्यवस्था / स्थिरता / आपूर्ति श्रृंखला

संदर्भ

  • पश्चिम एशिया में प्रत्येक तनाव भारतीय परिवारों पर मूल्य-आघात डालता है, जिससे यह प्रश्न उठता है कि क्या भारत को बड़े पैमाने पर अपने रसोईघरों का विद्युतीकरण करना चाहिए।

भारत की आवश्यकता: विद्युत रसोई की ओर बदलाव

  • उच्च आयात निर्भरता: भारत एलपीजी और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे खाना पकाने की ऊर्जा वैश्विक बाज़ारों और होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसी संवेदनशील मार्गों पर निर्भर रहती है।
  • सब्सिडी का बढ़ता राजकोषीय भार: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं में भारी सरकारी व्यय होता है, जो दीर्घकाल में सतत नहीं है।
  • परिवारों के लिए वहनीयता की समस्या: बिना सब्सिडी वाला एलपीजी महँगा है, जिसके कारण कई परिवार एलपीजी कनेक्शन होने के बावजूद लकड़ी और गोबर का उपयोग जारी रखते हैं।
  • जलवायु लक्ष्यों का समर्थन: विद्युतीकरण भारत के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप है, क्योंकि यह सौर जैसी नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को सक्षम बनाता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता: बिजली घरेलू रूप से (सौर, पवन) उत्पन्न की जा सकती है, जिससे आयातित ईंधनों पर निर्भरता घटती है।

विद्युत रसोई का महत्व

  • ऊर्जा दक्षता लाभ: विद्युत खाना पकाना (इंडक्शन, ईपीसी) लगभग 85% दक्ष है, जबकि एलपीजी लगभग 40% दक्ष है, जिससे कुल ऊर्जा खपत घटती है।
  • स्वच्छ और स्वास्थ्यकर खाना पकाना: यह बायोमास ईंधन से उत्पन्न इनडोर वायु प्रदूषण को समाप्त करता है, जिससे विशेषकर महिलाओं और बच्चों के श्वसन स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • बिजली की घटती लागत: इंस्टिट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस के अध्ययन से पता चलता है कि कई शहरी क्षेत्रों में विद्युत खाना पकाना पहले से ही बिना सब्सिडी वाले एलपीजी से सस्ता है।
  • रूफटॉप सौर के साथ एकीकरण: पीएम सूर्य घर योजना जैसी सरकारी पहलें परिवारों को अपनी ऊर्जा उत्पन्न और उपभोग करने में सक्षम बनाती हैं।

चुनौतियाँ

  • ग्रिड पर दबाव: शाम के चरम समय में विद्युत की बढ़ी हुई माँग ग्रिड पर दबाव डाल सकती है।
  • अवसंरचना की कमी: कई परिवारों के पास अब भी विश्वसनीय विद्युत या पर्याप्त लोड क्षमता नहीं है।
  • प्रारंभिक लागत: इंडक्शन चूल्हे, उपयुक्त बर्तन और वायरिंग उन्नयन में प्रारंभिक निवेश की आवश्यकता होती है।
  • व्यवहारगत बाधाएँ: भारत में खाना पकाना एक ही बर्तन में नहीं होता, बल्कि एक साथ कई व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जिससे विद्युत रसोई कम आकर्षक लगती है।
  • प्रौद्योगिकी सीमाएँ: वर्तमान इंडक्शन मॉडल लौ-आधारित पकाने की पूरी तरह नकल नहीं कर पाते।
  • नीति एवं पारिस्थितिकी तंत्र की कमी: स्मार्ट मीटर, डिमांड-रिस्पॉन्स सिस्टम और सहायक टैरिफ का व्यापक अभाव है।

आगे की राह

  • लक्षित विद्युतीकरण: शहरी परिवारों से शुरुआत की जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एलपीजी उपलब्ध रहे।
  • वित्तीय समर्थन: एलपीजी सब्सिडी का एक हिस्सा विद्युत खाना पकाने के उपकरणों हेतु एकमुश्त प्रोत्साहन में स्थानांतरित किया जाए।
  • ग्रिड आधुनिकीकरण: स्मार्ट ग्रिड, बैटरी भंडारण और डिमांड-रिस्पॉन्स सिस्टम में निवेश किया जाए।
  • अनुसंधान एवं विकास निवेश: भारतीय खाना पकाने (बहु-बर्तन, उच्च ताप) के अनुरूप इंडक्शन तकनीक विकसित की जाए।
  • सौर के साथ एकीकरण: रूफटॉप सौर और बैटरी प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाए ताकि चरम लोड घटे एवं ऊर्जा व्यापार संभव हो सके।

Source: TH

 

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